डार्क वेब (Dark Web) या डीप वेब (Deep Web) क्या है?

Google के द्वारा दिखाए जाने वाले सर्च की तुलना में 500 गुना अधिक कंटेंट डीप वेब(Deep Web) और डार्क वेब (Dark Web) में है।

डार्क वेब (Dark Web) / Deep Web एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन कंटेंट को स्टोर करता है। इस कंटेंट को आम या पारंपरिक सर्च इंजन जैसे कि गूगल (GOOGLE), याहू (YAHOO) आदि द्वारा नहीं खोजा जा सकता है।

Google इंटरनेट पर उपलब्ध एक छोटे से भाग को ही सर्च में दिखाता है। कुछ अनुमानों के अनुसार, इन्टरनेट में Google के द्वारा दिखाए जाने वाले सर्च की तुलना में 500 गुना अधिक कंटेंट/सामग्री होती है।

Deep Web and Dark Web Like Ice Berg

जब आप google पर कोई प्रश्न टाइप करते हैं तो, Google, जो सर्च रिजल्ट दिखता हैं, वह “सरफेस वेब(Surface Web)” कहा जाता है। जबकि बांकी कंटेंट्स जो सर्च में नहीं दिखाई देते उन्हें “डीप वेब (Deep वेब)” या “डार्क वेब(Dark Web)” कहा जाता है।

डार्क वेब(Dark Web) या डार्क नेट, डीप वेब (Deep Web)का एक छोटा सा हिस्सा है जिसे किसी उद्देश्य से छिपा कर रखा जाता है। डार्क वेब पर वेबसाइटों और डेटा को एक्सेस करने के लिए आमतौर पर एक विशेष टूल और ब्राउज़र की जरूरत होती है।

सबसे बड़ी बात तो यह कि डार्क वेब के कंटेंट और डेटा को गुमनामी के साथ एक्सेस किया जाता है। कोई आसानी से नहीं जान पता कि दुनिया में कौन डार्क वेब को एक्सेस कर रहा है। यूजर की पहचान सरकारों और निगरानी रखने वाली एजेंसी के निगाहों से सुरक्षित रहती है।

हालाँकि डार्क नेट पर सब कुछ वैध या अच्छा कंटेंट नहीं होता है, यहाँ आपको इंटरनेट के कई ब्लैक मार्केट, हैकर फ़ोरम, मैलवेयर बेचने वाले और अन्य अवैध या इललीगल(Illegal) चीजे मिलती है। इनसे भी ज्यादा खतरनाक तो यहाँ डार्क वेब का उपयोग हिटमैन या शूटर को Hire करने, मानव की तस्करी और चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिए किया जाता है।

ध्यान दे, यहाँ ब्लैक मार्किट से मेरा मतलब नशीले पदार्थ, हाथियार, चोरी हुए क्रेडिट कार्ड नंबर जैसे अवैध सामान खरीदे और बेचे जाते हैं।

कैसे एक्सेस करे डार्क वेब (Dark Web) / Deep Web?

अधिकांश डार्क वेब को एक्सेस करने के लिए, आपको Tor Browser की आवश्यकता होगी। Tor ब्राउज़र कि मदद से आप सरफेस वेब और डार्क वेब दोनों को सर्फ कर सकते है।

टॉर/Tor वालंटियर रिले का एक नेटवर्क है जिसके माध्यम से यूजर का इंटरनेट कनेक्शन रूट किया जाता है। यह कनेक्शन पूरे तरीके से एन्क्रिप्ट होता है। दुनिया भर में स्थित रिले के बीच ट्रैफ़िक बाउंस के कारण यूजर गुमनाम रहता है।

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर / ISP और वेबसाइटें पता लगा सकती हैं कि टोर का उपयोग कब किया जा रहा है क्योंकि टोर नोड कि IP/आईपी सार्वजनिक हैं।

हालाँकि वेबसाइटें आपकी पहचान नहीं कर सकती हैं और ISP ( Internet Service Provider)आपके इंटरनेट ट्रैफ़िक को डिक्रिप्ट नहीं कर सकते हैं लेकिन वे देख सकते हैं कि Tor का उपयोग किया जा रहा है।

यदि आप यह चाहते हैं कि वेबसाइट और ISP को यह पता नही चले कि आप tor उसे कर रहे हैं तो इससे बचने के लिए आप VPN का उपयोग कर सकते हैं।

अब जब आपके पास टॉर ब्राउज़र है, तो आप डार्क वेब को एक्सेस कर सकते हैं। डार्क नेट वेबसाइटों को “टोर हिडन सर्विसेज” कहा जाता है।

डार्क वेब के इन वेबसाइट के यूआरएल के अंत में “.onion होता है। जबकि अन्य सरफेस वेबसाइट या आम वेबसाइट में “.com” या “.org होता है। डार्क वेब एड्रेस को टॉप-लेवल डोमेन, “.onion” द्वारा पहचाना जा सकता है।

उदाहरण के लिए tikdamm की वेबसाइट “www.tikdamm.com” है। अगर इसकी जगह कोई डार्क वेब होता तो वह कुछ इस तरह से होता “www.websitename.onion”।

जाहिर है कि अब इन .onion वेबसाइटों को खोजना आसन नहीं है, क्योंकि वह Google सर्च रिजल्ट में दिखाई नहीं देंगे। इन डार्क नेट के वेबसाइट को खोजने के लिए कुछ ही सर्च इंजन हैं जो .onion साइटों को इंडेक्स करते हैं, इनमे NotEvil, Ahmia, Candle और Torch शामिल हैं।

.onion के सार्वजनिक रूप से पोस्ट किए गए URL का उपयोग करते समय हमेशा अत्यधिक सावधानी बरतें। कई डार्क वेब लोगों को बरगलाने के लिए डिज़ाइन किए गए यहाँ फ़िशिंग साइट और नए मैलवेयर की कोई कमी नहीं है। कई बार यह भी हो सकता है कि आप किसी साइट पर जाए और आपका कंप्यूटर या लैपटॉप हैक हो जाए या malware के कारण हमेशा के लिए बंद हो जाए।

फेसबुक / Facebook, द न्यूयॉर्क टाइम्स और अब सीआईए / CIA की भी डार्क वेब पर साइटें हैं, जो “.onion” फॉर्मेट में हैं जिन्हें टोर ब्राउज़र के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है।

डार्क वेब VS डीप वेब

डार्क वेब और डीप वेब, इन शब्दों को कभी-कभी एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किया जाता है, हालाँकि यह दोनों समान नहीं हैं।

डीप वेब सरफेस वेब के नीचे है होते हैं। दीप वेब सभी वेबसाइटों का लगभग 90% हिस्सा है।

डीप वेब कंटेंट में पेवॉल के पीछे कुछ भी शामिल होता है या इसके लिए साइन-इन क्रेडेंशियल की आवश्यकता होती है। जैसे कि उदाहरण के लिए मान ले कि आप gmail इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपके gmail कि सारी डिटेल्स आपको सीधे google पर नहीं मिलती इसके लिए आपको लॉग इन करना पड़ता है यह लॉग इन google इंडेक्स से छुपा कर डीप वेब में रखा जाता है। मेडिकल रिकॉर्ड, वेबसाइट मेम्बरशिप, गोपनीय कॉर्पोरेट वेब पेज डीप वेब के कुछ अन्य उदाहरण हैं।

डार्क वेब डीप वेब का एक सबसेट है जिसे जानबूझकर छिपाया जाता है। डार्क वेब तक जाने के लिए एक विशेष ब्राउज़र की आवश्यकता होती है जिसे TOR (टोर) कहते हैं।

हालांकि डीप वेब में डार्क वेब की साइटें शामिल हैं। इसमें वह साइटें भी शामिल हैं जिनका हम हर दिन उपयोग करते हैं, जैसे कि बिज़नेस इंट्रानेट, वेबमेल प्लेटफ़ॉर्म, डेटाबेस, ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफ़ॉर्म और ऐसे प्लेटफार्म जिनमे किसी पासवर्ड या दुसरे authentication की जरूरत होती है।

डीप वेब(Deep Web) – में ज्यादातर डेटा और डिजीटल रिकॉर्ड होते जैसे कि डेटाबेस, ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफ़ॉर्म, यूनिक पासवर्ड आदि।

डार्क वेब (Dark Web)- में आपराधिक गतिविधि ज्यादातर होती जैसे कि गैरकानूनी ड्रग्स, हत्यारे किराये पर, मानव तस्करी, चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी, शरीर के अंग कि तस्करी, बन्दूको की बिक्री, बिटकॉइन, क्रिप्टोक्यूरेंसी की खरीद व बिक्री आदि है।

आप कितनी भी सावधानी बरते, डीप वेब पर गुमनाम रहने की संभावना बहुत कम है।

डार्क वेब (Dark Web) का आविष्कार कब हुआ था?

डार्क वेब को आधिकारिक तौर पर 20 मार्च 2000 को लाया गया था। यह Freenet decentralized network system की शुरुआत के साथ इयान क्लार्क द्वारा लाया गया था। इसके लाने के पीछे यह मकसद था कि इसे आधिकारिक एजेंसी और जासूस कि निगाहों से छिपाया जा सके।

क्या .onion साइट अवैध/ Illegal हैं?

नहीं। .Onion की सभी वेबसाइटें अवैध नहीं है। यह केवल डार्क वेब पर साइटों द्वारा उपयोग किए जाने वाले डोमेन नाम हैं। कुछ कानूनी संगठनों के पास भी .onion के वेबसाइट हैं। इनमे Facebook और ExpressVPN शामिल हैं। हालाँकि .onion डोमेन वाली कुछ वेबसाइटों द्वारा इललीगल कंटेंट दिए जाते हैं जो उन्हें अवैध बनाती हैं।

डार्क वेब उन लोगों के लिए आकर्षक है जो ड्रग्स, हथियार या चोरी किए गए डेटा जैसे क्रेडिट कार्ट डिटेल्स खरीदना या बेचना चाहते हैं।

ध्यान रहे कि पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी इसका इस्तेमाल आतंकी समूहों और साइबर अपराधियों पर नजर रखने के लिए करती हैं। इसलिए गैरकानूनी साइट्स पर जाने से बचे।

कुल मिलाकर डार्क वेब पर सर्फिंग करना इललीगल नहीं है, लेकिन यह खतरनाक हो सकता है।

डार्क वेब कभी हैकर्स, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और साइबर अपराधियों कि ख़ुफ़िया जगह थी। हालाँकि, नई तकनीक जैसे एन्क्रिप्शन और anonymization ब्राउज़र सॉफ़्टवेयर जैसे कि टोर/ TOR से अब किसी के लिए भी डार्क वेब में गोता लगाना आसान हो गया है।

 

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